Sakti News : पारम्परिक तरीका से पैरा पुटू उगाने व पैरा का यूरिया उपचार की तकनीक सीख रहीं महिलाएं, ग्रामीण स्व रोजगार प्रशिक्षण संस्थान नन्दौरखुर्द में 13 दिवसीय क़ृषि उद्यमी प्रशिक्षण आयोजित

सक्ती. ग्रामीण स्व रोजगार प्रशिक्षण संस्थान नन्दौरखुर्द में आयोजित 13 दिवसीय क़ृषि उद्यमी प्रशिक्षण कार्यक्रम में ग्रामीण क्षेत्र के प्रत्येक गांव में क़ृषि और पशुपालन के को लेकर काम कर रही बिहान की क़ृषि सखी व पशु सखियों को संस्थान के प्रभारी निदेशक मनोज वर्मा के मार्गदर्शन में फेकेल्टी विक्टर कोसरिया, आशीष कुमार पाठक, मितेश साहू, संगीता सोनी, प्रदीप साहू व परमेश्वर सिदार के सहयोग से मास्टर ट्रेनर दीनदयाल यादव के द्वारा क़ृषि अवशेष को खेत में जलाने के बजाय उससे परंपरागत तरीके से पैरा पुटू ( मशरूम ) उगाने तथा पशुओं को खिलाने पैरा का यूरिया उपचार की विधि सिखाई जा रहीं है। मास्टर ट्रेनर दीनदयाल यादव ने बताया कि धान या गेहूँ का पैरा सामान्यतः कच्चा रेशा अधिक
प्रोटीन बहुत कम (2–3%)
यूरिया उपचार के बाद कच्चा प्रोटीन 7–9% तक बढ़ जाता है और पाचन क्षमता सुधरती है।

 



वहीं दूसरी तरफ पशु अधिक पोषक तत्व अवशोषित कर पाते हैं, पाचन शक्ति में सुधार होती है। उन्होंने बताया कि यूरिया से अमोनिया गैस बनती है, जो
रेशेदार भाग (लिग्निन-सेल्युलोज) को तोड़ती है,पैरा को मुलायम बनाती है। जुगाली करने वाले पशुओं के लिए सुपाच्य बनाती है,सस्ते चारे का विकल्प,महंगा दाना या खली की आवश्यकता कम,कम लागत में पौष्टिक चारा उपलब्ध कराना पैरा का यूरिया उपचार करना मुख्य उद्देश्य है।
सूखे मौसम में उपयोगी, दूध उत्पादन में वृद्धि,बेहतर पोषण,अधिक ऊर्जा
दूध की मात्रा और गुणवत्ता में सुधार,वजन बढ़ाने में सहायक
बकरी, भेड़ और गाय-भैंस में
तेजी से वजन वृद्धि,मांस उत्पादन में लाभ,पर्यावरण संरक्षण
और फसल अवशेष जलाने की बजाय मशरूम उत्पादन, जैविक खाद, पशु चारा के रूप में इस्तेमाल करने तकनीक सिखाई जा रहीं है।

प्रशिक्षण में डभरा ब्लॉक के पेंडरवा गाँव से अन्नपूर्णा बैरागी, चेतन बाई साहू समेत रचना साहू, रत्ना पाव अमलीपाली, पूसमती सिदार बघनी पाली, जैन कुमारी वारे, पूनम वारेन रेड़ा, जानकी पटेल, रजनी सिदार दर्री, फुलेश्वरी चंद्रा हरदीडीह, रीता साहू, कामिनी कौशल महंत सरवानी बाराद्वार, अनिता सिदार, भारती सिदार किरारी गुडेराडीह, अहिल्या मैत्री रैनखोल, प्रीति कंवर, सरोज जामचूआं, शारदा धनुहार, दिब्यां सिदार बुढनपुर, रजनी भारद्वाज सिंघितराई, नागेश्वरी निषाद विनोधा, भांति राठिया, अकोलजमोरा, सरस्वती कंवर, घुइचुआ, सम्मी टंडन भदरीपाली, शीला चौहान ओड़ेकेरा आदि शामिल हैं।

error: Content is protected !!