खरौद : इतिहास, आस्था और जल संरक्षण का अनुपम धरोहर

छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक नगरी खरौद अपनी प्राचीन सांस्कृतिक विरासत, धार्मिक आस्था और समृद्ध जल संरचनाओं के लिए विशेष पहचान रखती है। यहां स्थित भगवान लक्ष्मणेश्वर महादेव मंदिर आठवीं शताब्दी का एक महत्वपूर्ण पुरातात्विक एवं धार्मिक केंद्र है। मंदिर के शिलालेख में 1181 ई. चेदी संवत् 917 लिखा है। उपलब्ध शिलालेखीय साक्ष्य मंदिर की प्राचीनता को प्रमाणित करते हैं तथा इसे छत्तीसगढ़ के प्राचीनतम मंदिरों में स्थान देते हैं।

 



लोकमान्यता के अनुसार भगवान श्रीराम के अनुज लक्ष्मण ने मेघनाथ के प्रहार से उत्पन्न रोग से मुक्ति प्राप्त करने के पश्चात भगवान शिव की आराधना कर भगवान आशुतोष की स्थापना कराई थी। जो भगवान लक्ष्मणेश्वर के नाम से प्रसिद्ध है। प्राचीन समय में इसे लखनेश्वर कहा जाता था।मंदिर में स्थापित लाख छिद्रमुखी शिवलिंग श्रद्धालुओं और शोधकर्ताओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है। मंदिर की स्थापत्य कला, शिल्प एवं प्राचीन अभिलेख इसकी ऐतिहासिक महत्ता को और अधिक समृद्ध बनाते हैं। संस्कृति, साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में यह नगर प्राचीन काल से अग्रणी रहा है।

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यहां चार चिकित्सालय, 11 विद्यालय और एक महाविद्यालय सहित, 14 मंदिर स्थापित है।
खरौद को केवल धार्मिक नगरी कहना पर्याप्त नहीं होगा। यहां लगभग 126 तालाब और 45 प्राचीन कुएं विद्यमान हैं, जो नगर की प्राचीन जल प्रबंधन व्यवस्था के जीवंत प्रमाण हैं। वर्तमान जल संकट और पर्यावरणीय चुनौतियों के दौर में इन जलस्रोतों का संरक्षण एवं पुनर्जीवन समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। इनका वैज्ञानिक संरक्षण न केवल पेयजल समस्या का समाधान कर सकता है, बल्कि भूजल स्तर, जैव विविधता और पर्यावरणीय संतुलन को भी सुदृढ़ बना सकता है।

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मैं विगत दो वर्षों से खरौद की ऐतिहासिक धरोहरों, तालाबों, कुओं तथा जल संरक्षण की संभावनाओं पर अध्ययन एवं जनजागरण का कार्य कर रहा हूं। मेरा मानना है कि यदि स्थानीय समाज, प्रशासन और शोध संस्थान मिलकर कार्य करें, तो खरौद को धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ जल संरक्षण के राष्ट्रीय मॉडल के रूप में विकसित किया जा सकता है।
खरौद वास्तव में इतिहास, आस्था, संस्कृति और पर्यावरण चेतना का संगम है। इसकी धरोहरों का संरक्षण केवल स्थानीय दायित्व नहीं, बल्कि हमारी सामूहिक सांस्कृतिक जिम्मेदारी है। लेखक : डॉ. गुलाब चंद भारद्वाज, विद्यासागर (साहित्य वाचस्पति)
शोधकर्ता – खरौद की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं जल विरासत

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