हनुमान जी का चमत्कारी मंदिर जहां सफेद पेज पर मिलते है भक्तों को सवालों के जवाब

आपने हनुमान जी के मौजूदगी की कई कहानियां जरूर सुनी होंगी। चलिए हम आपको आज यहां पर हनुमान जी के वर्तमान में भी उपस्थिति से जुड़ी एक विशेष मंदिर के बारे में बताते है। जिसकी मान्यता कई मायनों में बागेश्वर सरकार जैसी है। यहां पर भी भक्तों की श्रद्धा पर्ची से जुड़ी है। अपने समस्याओं का निवारण पाने हेतु भक्तगण इस मंदिर में उपस्थिति दर्ज करते है। भक्तों के बीच इस मंदिर की बहुत प्रसिद्धि है।

 



 

 

 

 

कोटा में खास है यह मंदिर
पर्ची निकालकर समस्या का निवारण करने की कहानी आपने बागेश्वर सरकार के कथा समारोह में जरूर देखी होगी। लेकिन यदि हम आपको बताए कि राजस्थान के कोटा में इसी तरह का वो भी हनुमान जी का ही मंदिर है जहां हनुमान जी स्वयं भक्तों के दुखों को दूर करने के लिए उपाय का सुझाव देते है। यह मंदिर चमत्कारी बालाजी धाम के नाम से स्थानीय लोगों के साथ राज्य भर में भी नहीं पूरे भारत में प्रसिद्ध है।

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मंदिर का नाम: चमत्कारी बालाजी धाम , नांता,करनी नगर (कोटा,राजस्थान)
लोकेशन: 6R32+C4M, कोटा, राजस्थान
समय: सुबह 9 बजे से शाम के 6 बजे तक
ऐसे पहुंच सकते है यहां
कोटा से 15 किलोमीटर दूर नान्ता गांव स्थित चमत्कारेश्वर हनुमान मंदिर है।
ऐसे करते है परेशानी का निवारण

 

 

 

ऐसे करते है परेशानी का निवारण

इस मंदिर में भक्त अपने दुखों को दूर करने के लिए अर्जी लगाने आते है।यहां आने वाले भक्तों व मंदिर के पुजारी दावा करते है कि यहां पर हनुमानजी स्वयं पर्चे पर लिखकर भक्तों के सवालों का जवाब देते हैं। मंदिर के पुजारी का कहना है कि हनुमान भक्त शनिवार या मंगलवार को मंदिर में आकर हनुमान जी के सामने अपनी आंखें बंद करके एक ही सवाल को मन ही मन दोहराते रहते है। इसके बाद पुजारी दोनों तरफ से भगवान की प्रतिमा के पास एक खाली पेपर को सभी को दिखाकर रख देते हैं और थोङी देर बाद पुजारी द्वारा पेपर पर केसर-सिन्दूर से लिखित जवाब पुजारी जी को मिलता है। जिसे पुजारी जी सबको दिखाते है। इस घटना के साक्षी कई भक्त है। इसलिए इस मंदिर के लिए भक्तों की श्रद्धा अटूट है।

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इस दिन उमड़ता हैं भक्तों का हुजूम

 

ऐसा कहा जाता है कि मंदिर में स्थापित हनुमानजी भगवा रंग की प्रतिमा चंबल नदी से निकली थी। जो की चमत्कारिक है। मंदिर में शनिवार और मंगलवार को भक्तों का विशाल जमावड़ा लगता है। मंदिर के पुजारी बताते हैं हनुमान जी शनिवार और मंगलवार को ही कागज में लिखकर भक्तों के सवालों का जवाब देते हैं। भगवान की प्रतिमा पर जो सिंदूर चढ़ाया जाता है उससे ही सवालों के जवाब लिखे मिलते है।

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