किसी सख्त चीज से टकरा जाए कोहनी, तो क्यों लगता है करंट? अगर कभी किया है महसूस तो जान लीजिए कारण..

बिजली का तार, या कोई स्विच छूने से करंट लगता है. इस झटके से तो बहुत से लोग परिचित होंगे, कभी न कभी हर किसी का सामना बिजली के झटके से हो जाता है. पर क्या आपने कभी बिना बिजली के लगने वाले करंट के झटके को महसूस किया है जो आपकी कोहनी पर लगता है? जब हमारी कोहनी किसी सख्त चीज से टकराती है, तो उसमें करंट (Why We Feel Electric Shock in Elbow) लगता है. ये बहुत आम चीज है और बहुत लोग इसको अनुभव कर चुके होंगे. आज हम आपको इस झटके का कारण बताने जा रहे हैं.



 

 

 

 

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म कोरा पर अक्सर आम लोग अपने सवाल पूछते हैं और आम लोग ही उनके जवाब देते हैं. हालांकि, इस जवाबों को पूरी तरह सही नहीं माना जा सकता क्योंकि हर बार जरूरी नहीं होता कि ये जवाब किसी विषय के जानकार लोगों ने दिया हो. इस वजह से हम आपको कोरा के जवाबों को बताने के बाद विश्वस्नीय सोर्सेज से भी बताते हैं कि असलियत क्या है. कुछ समय पहले कोरा पर किसी ने पूछा- “कोहनी अचानक से टकरा जाए तो करंट क्यों लगता है?” (Why Elbow Experience Shock) सवाल काफी रोचक था, लोगों के जवाब उससे भी ज्यादा रोचक हैं.

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कोरा पर लोगों ने दिया जवाब

शख्स ने लिखा- “शरीर में एक अल्‍नर नर्व होती है. यह नर्व स्‍पाइन से निकलती है और कंधों से होते हुए उंगली तक पहुंचती है. यह नर्व कोहनी की हड्डी को सुरक्षा देने का काम करती है. इसलिए जब भी इस नर्व पर कोई चीज टकराती है तो इंसान को लगता है कि असर हड्डी पर हुआ है जबकि सीधे तौर पर वो अल्‍नर नर्व प्रभावित होती है. ऐसा होने पर न्‍यूरॉन्‍स ब्रेन तक सिग्‍नल पहुंचाते और रिएक्‍शन होने पर करंट सा झटका लगता है. कोहनी से गुजरने वाला हिस्सा केवल त्वचा और फैट से ढका होता है. इस तरह जब कोहनी किसी चीज से टकराती है तो इस नर्व को झटका लगता है. आसान भाषा में समझें तो इस हिस्‍से में चोट लगने का मतलब है अल्‍नर नर्व पर चोट लगना. सीधे नर्व पर पड़ने वाला यह दबाव एक तेज झनझनाहट, गुदगुदी या दर्द के रूप में महसूस होता है.”

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जानिए आखिर किया है असल वजह

ये तो हो गए लोगों के दिए जवाब. अब चलिए आपको विश्वस्नीय सोर्स से बताते हैं कि ऐसा क्यों होता है. विज्ञान पर आधारित प्रतिष्ठित वेबसाइट के मुताबिक अल्नर नर्व को फनी बोन कहा जाता है. फनी इसलिए क्योंकि ये करंट लगने का झूठा संकेत देती है. ये गर्दन से शुरू होकर उंगलियों तक जाती है. इस नर्व का नाम उस हड्डी पर पड़ा है जो बांह के निचले हिस्से में होती है और उसका बाहर निकला हुआ उभार कोहनी का काम करता है. हमारे शरीर की सारी नर्व मांसपेशियों के द्वारा छुपी होती हैं जिससे उन्हें किसी तरह का खतरा ना हो. अल्नर नर्व के साथ भी ऐसा ही है. ये मांस और मांसपेशियों से बची रहती है मगर कोहनी वाली जगह पर, जहां हाथ की ऊपरी हड्डी और निचली हड्डी मिलती हैं, ये नर्व ढकी नहीं रहती है. यहां एक क्यूबिटल टनल होता है जहां सिर्फ स्किन और फैट से ये नर्व छुपी रहती है. इस वजह से यहां पर जब इस नर्व को छुआ जाए, तो ये सेंसेशन पैदा करती है. जब कोहनी किसी सख्त चीज से टकराती है, तो ये नर्व, हड्डी से दबती है और इसकी वजह से दिमाग बिजली के झटके जैसा अनुभव करवाता है जिससे लोग तुरंत अपनी कोहनी को वहां से हटा लेते हैं.

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