SC Verdict on Navjot Sidhu: नवजोत सिद्धू को एक साल की सजा, 34 साल पुराने रोडरेज केस में सुप्रीम कोर्ट का फैसला

पंजाब कांग्रेस के नेता नवजोत सिंह सिद्धू को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। 34 साल पुराने रोड रेज मामले में सिद्धू को एक साल जेल की सजा दी गई है। कारावास सश्रम होगा। सिद्धू को पंजाब पुलिस हिरासत में लेगी। इससे पहले सिद्धू ने सुप्रीम कोर्ट से अपने खिलाफ रोडरेज मामले में दायर पुनर्विचार याचिका खारिज करने का अनुरोध किया था।

 



सिद्धू ने पुनर्विचार याचिका के जवाब में कहा कि यह घटना 33 साल पहले की है और याचिका विचारणीय नहीं है। सिद्धू ने अपनी स्वच्छ प्रतिष्ठा का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट से मामले में उनकी सजा में बदलाव नहीं करने का आग्रह भी किया था।

पहले मिली थी मात्र एक हजार के जुर्माने की सजा

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में सिद्धू को मात्र एक हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई थी। इसके बाद पीड़ित पक्ष ने इस पर पुनर्विचार याचिका दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के उस आदेश को 15 मई 2018 को दरकिनार कर दिया था जिसमें रोडरेज के मामले में सिद्धू को गैरइरादतन हत्या का दोषी ठहराते हुए तीन साल कैद की सजा सुनाई थी।

इसे भी पढ़े -  Raigarh News : बोर्ड परीक्षा परिणाम सुधार के लिए कलेक्टर ने दिए विशेष कार्ययोजना बनाने के निर्देश, फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी और मैथमेटिक्स में शिक्षकों की उपलब्धता पर जोर, ड्रॉपआउट रोकने, कमजोर विद्यालयों की समीक्षा और स्मार्ट क्लास के बेहतर उपयोग के निर्देश

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने सिद्धू को एक 65 वर्षीय वरिष्ठ नागरिक को जानबूझकर चोट पहुंचाने का दोषी माना था लेकिन उन्हें जेल की सजा नहीं दी थी और 1000 रुपये का जुर्माना लगाया था। भारतीय दंड संहिता की धारा 323 के तहत इस अपराध के लिए अधिकतम एक साल जेल की सजा या 1000 रुपये जुर्माने या दोनों का प्रावधान है।

इसे भी पढ़े -  Raigarh News : जनऔषधि केंद्र में 50 से 90 प्रतिशत तक कम कीमत पर गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाएं उपलब्ध, मेडिकल कॉलेज परिसर स्थित केन्द्र का जिला पंचायत सीईओ ने किया निरीक्षण

1988 का है मामला

यह मामला दिसंबर 1988 का है। सिद्धू पटियाला में कार से जाते समय बुजुर्ग गुरनाम सिंह से भिड़ गए थे। गुस्से में सिद्धू ने उन्हें मुक्का मारा जिसके बाद गुरनाम सिंह की मौत हो गई थी। पटियाला पुलिस ने सिद्धू और उनके दोस्त रुपिंदर सिंह के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया था। निचली अदालत ने 1999 में सिद्धू को बरी कर दिया था लेकिन पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने 2006 में सिद्धू को इस मामले में तीन साल की सजा सुनाई थी।

सिद्धू तब भाजपा के अमृतसर से सांसद थे। सजा के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद सिद्धू ने सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के फैसले का चुनौती दी थी।

इसे भी पढ़े -  Raigarh News : 50 टीबी मरीजों को सिविल अस्पताल खरसिया में फ़ूड बास्केट का किया गया वितरण, मरीजों को नियमित दवा सेवन के साथ पौष्टिक आहार लेने के लिए भी किया गया जागरूक

Related posts:

error: Content is protected !!