भीख मांगकर…गुजारा करता था स्वीपर, जब सच्चाई सामने आई… तो उड़े सबके होश…पढिए विस्तार से

हमने अक्सर देखा है कि कई लोग अन्य लोगों उनके कपड़ों और वेश-भूषा से जज करते हैं। लोग किसी के गंदे कपड़े देख कर उसे गरीब समझ लेता है, लेकिन कभी कभी लोगों का ये अंदाजा गलत भी हो जाता है। प्रयागराज के सीएमओ आफिस कार्यरत एक स्वीपर के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ।

 



करोड़पति निकला स्वीपर

उसको देखकर हर इंसान उसे भिखारी समझता था, वह लोगों से पैसे मांग कर अपने घर का खर्च चलाता है। लेकिन, ऊपर से ऐसा दिखने वाला स्वीपर करोड़पति है यह सुनकर सभी हैरान हो गए। स्वीपर के खाते में 70 लाख रुपये हैं। प्रयागराज में उसके नाम पर जमीन है और मकान भी। सबसे बड़ी बात तो यह है कि उसने 10 साल से अपनी सैलरी ही नहीं निकाली है।

पैसे नहीं निकालने से परेशान है बैंक वाले : बैंक वाले पैसा लगातार जमा होने और नहीं निकाले जाने से परेशान हैं। अब वो युवक से सैलरी निकालने की गुजारिश कर रहे हैं, लेकिन स्वीपर का खर्च तो लोगों से पैसे मांगकर चल जाता है। ऐसे में उसे पैसे निकालने की जरूरत ही नहीं पड़ती। उसकी वेशभूषा और गंदे कपड़ों को देखकर लोग उसे भिखारी समझ लेते हैं। वह लोगों के पैर छूता है तो उसे पैसे भी मिल जाते हैं।

इसे भी पढ़े -  JanjgirChampa News : समाजसेविका इंजी. मंजूषा पाटले को मिली बड़ी जिम्मेदारी, छत्तीसगढ़ नागरिक सुरक्षा वेलफेयर फाउंडेशन की बनीं प्रदेश महासचिव...समर्थकों एवं शुभचिंतकों में हर्ष का माहौल...

ऑफिस पहुंचे बैंक वाले तो हुआ खुलासा

दरअसल, स्वीपर का काम करने वाले युवक का नाम धीरज है। धीरज की सच्चाई उस समय सामने आई जब बैंक के कर्मचारी उसे ढूंढते हुए कुष्ठ रोग विभाग पहुंचे। जहां उन्होंने धीरज के बारे में जानकारी मांगी तो कर्मचारियों ने उसे गरीब बताया। इस पर बैंक कर्मचारियों ने कहा कि उसके खाते में मोटी रकम मौजूद है। उसने 10 साल से अपना वेतन ही नहीं निकाला है। धीरज के पास अपना जमीन-मकान होने की भी बात बैंक कर्मियों ने बताई। इसके बाद कर्मचारियों को पता चला कि वह करोड़पति है।

इसे भी पढ़े -  Akaltara News : श्री ऋषभ विद्योदय महाविद्यालय बनाहिल में भव्य दीक्षारंभ समारोह संपन्न, जिसके जीवन में अनुशासन, उसके हाथ में भविष्य : कुलपति डॉ. चौहान, नए सफर की हँसी भरी शुरुआत, नवप्रवेशी छात्रों के स्वागत में सजा हास्य कवि सम्मेलन

अनुकंपा के आधार पर मिली है नौकरी

धीरज को यह नौकरी उसके पिता की जगह पर मिली है। धीरज के पिता जिला कुष्ठ रोग विभाग में स्वीपर के पद पर कार्यरत थे और नौकरी के बीच ही उनकी मौत हो गयी। अनुकंपा के आधार पर धीरज को वर्ष 2012 में उनकी जगह पर स्वीपर की नौकरी मिल गई। उसके बाद से अब तक उसने बैंक से सैलरी नहीं निकाली है।

लेकिन, खास बात यह है कि धीरज आयकर दाता है और सरकार को इनकम टैक्स जमा करता है। वह अपनी मां और बहन के साथ रहता है। धीरज की अभी शादी नहीं हुई है और वह शादी नहीं करना चाहता।

इसे भी पढ़े -  JanjgirChampa News : एम्स में ब्लड कैंसर से पीड़ित दीपमाला का होगा इलाज, भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश प्रवक्ता व समाजसेवी इंजी. रवि पाण्डेय के प्रयास से CM विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना से मिली 17.89 लाख की आर्थिक सहायता...

उसे डर है कि कहीं उसके पैसे कोई ले न ले। कुष्ठ रोग विभाग के कर्मचारियों के अनुसार, धीरज दिमागी रूप से कुछ कमजोर है।

error: Content is protected !!