Health Risk: बच्चे कम उम्र में हो रहे गंभीर बीमारी के शिकार, ध्यान दें वरना बढ़ सकता है खतरा

नई दिल्ली. आजकल के लोगो का लाइफस्टाइल पुराने जमाने वाले लोगों से पूरी तरह अलग है। शायद यहीं वजह है कि लोग कम उम्र में ही गंभीर बीमारी का सामना कर रहे हैं। लोग अक्सर अपने मोटापे और हाई बीपी को लेकर हैरान रहते हैं।

 



जीवन को खुश करने के लिए बढ़ती उम्र के साथ हर टूल बनाया गया है जैसे बच्चों के लिए खेलना-कूदना मस्ती करना खूब सोना और पढ़ना फिलहाल इस उम्र में खुशियों का यही टूल है, लेकिन आपको जानकार हैरानी हो सकती है की बच्चे भी हाई बीपी के शिकार हो रहे हैं उनका मोटापा तेजी से बढ़ रहा है, दिमाग के हार्मोन्स का प्रोसेस स्लो होता जा रहा है।

इसे भी पढ़े -  ग्रेट प्लेस टू वर्क द्वारा वेदांता को भारत के शीर्ष 100 सर्वश्रेष्ठ कार्यस्थलों में स्थान, वेदांता के कार्यबल में 23 प्रतिशत महिलाएं, लगभग 100 ट्रांसजेंडर कर्मचारी और पिछले 5 वर्षों में ESOP के माध्यम से कर्मचारियों के लिए लगभग ₹2,500 करोड़ की संपत्ति (वेल्थ) का सृजन

ये सोचने वाली बात है कि क्या सच में बच्चें भी 30 साल की उम्र वाली बीमारी का शिकार अभी से हो रहे हैं। बाहर शहरों में रहने वाले बच्चों में ऐसी क्या कमी हो रही है जिससे वो हाइपरटेंशन और ओबेसिटी जैसी बीमारयों का अभी से शिकार हो रहे हैं।

हमें अपने जीवन को बचपन से ही मजबूत बनाना चाहिए। अगर हम आज के आधुनिक जीवन के अनुसार चलेंगे तो दिमाग के हार्मोन्स ज्यादा काम नहीं करेंगे बल्कि मोटापा बढ़ेगा हाई बीपी के शिकार होंगे और हाइपरटेंशन बढ़ेगा।

इस बात पर गौर करना बहुत जरूरी है, क्योंकि आने वाले समय में यही बच्चे देश के भविष्य हैं जिसकी नैतिक जिम्मेदारी और सबसे बड़ी भूमिका पेरेंट्स की होती है।

इसे भी पढ़े -  वेदांता ने एक दशक में सरकारी खजाने में करीब 5 लाख करोड़ का दिया योगदान, वेदांता ग्रुप देश के खजाने में योगदान देने वाले भारत के टॉप 3 प्राइवेट सेक्टरों में से है एक

जीवन की कीमत बढ़ते उम्र के साथ समझ आती है, लेकिन अभी वो बच्चें है उनका जीवन कुम्हार के मिटटी की तरह है जिसे अभी किसी भी आकार का शेप दे सकते हैं। जिस तरह कुम्हार मिटटी से दियाली, घड़ा, सुराही बनाता है उसी तरह आप बच्चों को जीवन की अहमियत के बारें में बताएं।

ऑनलाइन गेमिंग खेलने के लिए मोबाइल देने के बजाय उनको किताब के एक अध्याय का महत्व बताएं और आपके पास समय नहीं तो उन्हें खेलने-कूदने के लिए कहे। अच्छा पौष्टिक खाना देना शुरू करें और किसी भी बीमारी को नजर अंदाज न करें बल्कि डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

इसे भी पढ़े -  वेदांता ने एक दशक में सरकारी खजाने में करीब 5 लाख करोड़ का दिया योगदान, वेदांता ग्रुप देश के खजाने में योगदान देने वाले भारत के टॉप 3 प्राइवेट सेक्टरों में से है एक
error: Content is protected !!