उपराष्ट्रपति : पक्ष-विपक्ष के दोनों उम्मीदवारों के बारे में जानिए ये खास बातें…

दिल्ली. उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए राजग के उम्मीदवार जगदीप धनखड़ और विपक्ष की संयुक्त उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा रही. आपको बता दें कि मौजूदा उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू का कार्यकाल 10 अगस्त को समाप्त हो रहा है. उपराष्ट्रपति के पद पर 11 अगस्त को शपथ ग्रहण होगा.

 



उपराष्ट्रपति पद के दोनों उम्मीदवारों के बारे में जानिए –

जगदीप धनखड़
जगदीप धनखड़ का जन्म झुंझुनूं जिले के गांव किठाना में साल 1951 में साधारण किसान परिवार में हुआ था. उनके पिता का नाम गोकल चंद और मां का नाम केसरी देवी है. जगदीप अपने चार भाई-बहनों में दूसरे नंबर के लड़के हैं. 1979 में उनकी शादी सुदेश धनखड़ से हुई. उन दोनों की एक बेटी कामना है, जिसकी शादी कार्तिकेय वाजपेयी से हुई है

राजस्थान हाईकोर्ट में कर चुके हैं वकालत
उनकी शुरुआती पढ़ाई गांव किठाना के ही सरकारी माध्यमिक विद्यालय से हुई थी. गांव से पांचवीं तक की पढ़ाई के बाद उनका दाखिला गरधाना के सरकारी मिडिल स्कूल में लिया. इसके बाद उन्होंने चित्तौरगढ़ के सैनिक स्कूल में भी पढ़ाई की. 12वीं के बाद भौतिकी में स्नातक करने के बाद जगदीप धनखड़ ने राजस्थान विश्वविद्यालय से कानून की पढाई पूरी की थी. धनखड़ का चयन आईआईटी, एनडीए और आईएएस के लिए भी हुआ था, लेकिन उन्होंने वकालत को चुना. उन्होंने अपनी वकालत की शुरुआत भी राजस्थान हाईकोर्ट से की थी. वे राजस्थान बार काउसिंल के चेयरमैन भी रहे थे.

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धनखड़ ने अपनी राजनीति की शुरुआत जनता दल से की थी. धनखड़ 1989 में झुंझनुं से सांसद बने थे. उन्हें 1989 से 1991 तक वीपी सिंह और चंद्रशेखर की सरकार में केंद्रीय राज्य मंत्री भी बनाए गए थे. हालांकि, जब 1991 में हुए लोकसभा चुनावों में जनता दल ने जगदीप धनखड़ का टिकट काट दिया तो वह पार्टी छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गए और अजमेर के किशनगढ से कांग्रेस पार्टी के टिकट पर 1993 में चुनाव लड़ा और विधायक बने. 2003 में उनका कांग्रेस से मोहभंग हुआ और वे कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए. 70 साल के जगदीप धनखड़ को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 30 जुलाई 2019 को बंगाल का 28वां राज्यपाल नियुक्त किया था.

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मार्गरेट अल्वा –
अल्वा 1974 में पहली बार राज्यसभा की सदस्य चुनी गईं. उन्होंने छह-छह साल के चार कार्यकाल लगातार पूरे किए. इसके बाद वे 1999 में वे लोकसभा के लिए चुनी गईं. उन्हें 1984 में संसदीय कार्य राज्यमंत्री और बाद में युवा और खेल, महिला एवं बाल विकास का दायित्व भी मिला 1991 में उन्हें कार्मिक, पेंशन, जन अभाव अभियोग और प्रशासनिक सुधार राज्यमंत्री का जिम्मा दिया गया था. अल्वा राजस्थान, गोवा जैसे राज्यों की राज्यपाल रह चुकी हैं.

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