



जांजगीर-चाम्पा. ग्रामीण अंचल में सामाजिक जागरूकता और जेंडर समानता की मिसाल पेश करते हुए ग्राम झपेली (बलौदा) में ‘किशोरी यूथ क्लब’ की युवतियों की पहल पर एक रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर ने न केवल जरूरतमंद मरीजों के लिए रक्त उपलब्ध कराया, बल्कि समाज में महिलाओं की नेतृत्व क्षमता और सहभागिता को भी सशक्त रूप से उजागर किया। साथ ही सरपंच के सहयोग से जनसेवा एवं ग्राम विकास का भी मिसाल प्रस्तुत हुआ।
इस आयोजन की परिकल्पना और क्रियान्वयन गाँव की युवा लड़कियों ने स्वयं की। अर्चना, निशा, क्रुति, ने सबसे पहले अपने ‘किशोरी यूथ क्लब’ की 20 सदस्यों से चर्चा की। उसके बाद घर-घर जाकर लोगों को रक्तदान के महत्व के बारे में जागरूक किया। युवाओं को शिविर में भाग लेने के लिए प्रेरित किया। परिणामस्वरूप शिविर में 200 ग्रामीणों ने हिस्सा लिया। 28 युवाओं ने उत्साहपूर्वक रक्तदान किया।
शिविर की सफलता में झपेली ग्राम के सरपंच चन्द्रशेखर कश्यप का सहयोग भी उल्लेखनीय रहा। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि “जब गाँव की बेटियाँ आगे बढ़कर समाजहित का कार्य करती हैं, तो पूरा गाँव उनके साथ खड़ा होता है। यह पहल आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी।” स्वास्थ्य विभाग की टीम की देखरेख में शिविर का आयोजन किया गया, जहाँ चिकित्सकों ने रक्तदाताओं की जाँच कर सुरक्षित तरीके से रक्त संग्रह किया। डॉक्टरों ने बताया कि एक यूनिट रक्त से कई जिंदगियाँ बचाई जा सकती हैं, और ऐसे शिविर ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाते हैं।
यह आयोजन सामाजिक बदलाव की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ। जहाँ पहले रक्तदान जैसे विषयों पर झिझक और गलत धारणाएँ थीं। ‘हमसे होगी बदलाव की शुरुआत’ के स्लोगन के माध्यम से गाँव की लड़कियों ने नेतृत्व संभालकर सोच में सकारात्मक परिवर्तन लाया है। रक्त शिविर से पहले अधिकांश लोगों को अपना ब्लड ग्रूप भी नहीं पता था और न ही हीमोग्लोबिन लेवल ही मालूम था। इस शिविर की चर्चा आस-पास के गांवों में भी है कि झपेली गाँव की लड़कियों नेअपने गाँव में रक्तदान शिविर का आयोजन किया। यह शिविर जेंडर पहल का सशक्त उदाहरण है, जिसमें महिलाओं ने केवल सहभागिता ही नहीं, बल्कि नेतृत्व भी किया।
कार्यक्रम के अंत में स्वास्थ टीम एवं सरपंच ने मितानीन अनुसूईया कश्यप, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता रेखा कश्यप और और ‘किशोरी युवा क्लब’ की इस पहल की सराहना की। ग्रामीणों ने एक स्वर में ऐसी पहलों को नियमित रूप से आयोजित करने की मांग की। यह रक्तदान शिविर निस्संदेह गाँव की लड़कियों एवं झपेली के लिए गर्व का विषय बना, और साबित किया कि जब बेटियाँ आगे आती हैं, तो समाज नई दिशा पाता है।






