Kisaan School : कृषि सखी ने देश के पहले किसान स्कूल को भेंट किया तुमड़ी, छत्तीसगढ़ के किसानों के सहयोग से संग्रहालय में अब तक दर्जनों विलुप्त चीजों का हो चुका है संरक्षण, किसान स्कूल के ‘धरोहर’ ने बनाई बड़ी पहचान

जांजगीर-चाम्पा. भारत का पहला किसान स्कूल, जहां छत्तीसगढ़ के किसानों ने विलुप्त चीजों को सहेज कर रखने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हाल ही में सक्ती जिले के पलाड़ीकला गांव की कृषि सखी श्याम बाई साहू ने वरिष्ठ पत्रकार कुंजबिहारी साहू किसान स्कूल बहेराडीह के संचालक दीनदयाल यादव को सालों पुराने पानी को सुरक्षित रखने वाले तुमड़ी भेंट किया है. इसके साथ ही पुराने जमाने में हवला या गगरी रखने के लिए इस्तेमाल किये जाने वाले कृषि अवशेष पराली से बनने वाली भरेरी और पैरा डोरी भी भेंट किया है.



किसान स्कूल के संचालक दीनदयाल यादव ने बताया कि छत्तीसगढ़ के अलग अलग जिले के किसानों ने विलुप्त चीजों को किसान स्कूल को भेंट किया है. किसान स्कूल परिसर में किसानों ने एक संग्रहालय विकसित किया है, जिसे ‘धरोहर’ का नाम दिया गया है. इस धरोहर में विलुप्त चीजों को सहेजने के उद्देश्य को लेकर किसान स्कूल की टीम द्वारा ‘पुरखा का सुरता अभियान’ चलाया जा रहा है. इस अभियान के तहत विलुप्त चीजों को सहेजने के साथ साथ जल, जंगल और जमीन को बचाने गांव-गांव टीम पहुँच रही है.

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किसान स्कूल के संचालक ने यह भी बताया कि किसान स्कूल की स्थापना 23 दिसंबर 2021 को अंतरराष्ट्रीय किसान दिवस के अवसर पर जिले के जैविक कृषि ग्राम तथा कृषि विज्ञान केंद्र भारत सरकार के गोद ग्राम बहेराडीह में किया गया है. यहाँ पर प्रतिवर्ष 23 दिसंबर को अंतरराष्ट्रीय किसान दिवस धूमधाम से मनाया जाता है. इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के प्रगतिशील किसानों का सम्मान और किसानों तथा उनके बच्चों द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति भी दी जाती है. सालभर में एक बार मनाए जाने वाले किसान दिवस कार्यक्रम में प्रगतिशील किसानों के अलावा सामाजिक कार्यकर्ता, सामजिक संगठन, अफसर, जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति होती है.

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