




जाजंगीर-चाम्पा. बिहान (राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन) से जुड़ी महिलाओं के लिए बीमा बहुत जरूरी होता है क्योंकि यह उनके जीवन, परिवार और आजीविका को सुरक्षा प्रदान करता है। गांव की महिलाएं अक्सर सीमित आय पर निर्भर रहती हैं। उक्त बातें ग्रामीण स्व रोजगार प्रशिक्षण संस्थान जांजगीर में आयोजित आचार, पापड़, मसाला उद्योग प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिला पंचायत छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के डीएमएम उपेंद्र कुमार दुबे ने ब्यक्त किया।

उन्होंने आगे बताया कि किसी दुर्घटना, बीमारी या मृत्यु की स्थिति में बीमा आर्थिक सहारा देता है और परिवार को संकट से बचाता है। आकस्मिक जोखिम से बचाव, दुर्घटना, प्राकृतिक आपदा या अचानक बीमारी कभी भी हो सकती है। बीमा इन जोखिमों को कम करता है और नुकसान की भरपाई करता है। महिलाएं परिवार की महत्वपूर्ण सदस्य होती हैं। यदि उनके साथ कुछ अनहोनी हो जाए, तो बीमा उनके बच्चों और परिवार को वित्तीय सहायता देता है। उन्होंने आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास के बारे में बताया कि बीमा होने से महिलाओं में सुरक्षा की भावना आती है, जिससे वे बिना डर के अपने कार्य (जैसे खेती, पशुपालन, उद्यम) कर पाती हैं।
बिहान की महिलाएं अक्सर छोटे व्यवसाय करती हैं (जैसे डेयरी, बकरी पालन, सब्जी उत्पादन)। बीमा से नुकसान का जोखिम कम होता है और वे व्यवसाय को आगे बढ़ाने में आत्मविश्वास महसूस करती हैं।
जिला पंचायत एसआरएलएम के अधिकारी रेशम लाल नामदेव ने बताया कि सरकार ने महिलाओं के लिए कई सस्ती बीमा योजनाएं शुरू की हैं, जैसे: प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (जीवन बीमा)
प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (दुर्घटना बीमा)
इन योजनाओं में कम प्रीमियम पर अच्छा कवर मिलता है।
जब स्वयं सहायता समूह (SHG) की सभी महिलाएं बीमित होती हैं, तो पूरा समूह आर्थिक रूप से मजबूत और सुरक्षित बनता है। प्रशिक्षण कार्यक्रम के मास्टर ट्रेनर दीनदयाल यादव ने क़ृषि और पशुपालन के अलावा कई प्रकार की आजीविका गतिविधियों के बारे में बताया। प्रशिक्षण में जिले के बलौदा और बम्हनीडीह ब्लॉक के 30 क़ृषि सखी और पशु सखियाँ शामिल हैं।





