



रायपुर. सुग्रीव कीला, अयोध्या, (उत्तर प्रदेश) पीठाधीश्वर अनंतश्री विभूषित श्री स्वामी विश्वेश प्रपन्नाचार्य महाराज ने श्री दूधाधारी मठ रायपुर पहुंच कर महामंडलेश्वर राजेश्री महन्त रामसुन्दर दाs महाराज से सौजन्य मुलाकात करके भारतवर्ष की आध्यात्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, एवं राजनीतिक परिस्थितियों पर गहन विचार विमर्श किया और गोस्वामी तुलसीदास जी महाराज रचित विनय पत्रिका की सूक्ति वाक्य का उल्लेख करते हुए कहा कि – अबलौं नसानी, अब न नसैहौं। राम कृपा भव निसा सिरानी जागे फिरि न डसैहौं।। अर्थात -अरे मन, अब तक तो तू मोह माया रुपी रात्रि में सो रहा था, राम जी की कृपा से भव बंधन समाप्त हो चुका है.
अब फिर से सोने का समय नहीं है। दोनों महात्माओं ने एक दूसरे का शाल एवं पुष्प माला से सम्मान किया। स्वामी जी ने मार्च महीने में अयोध्या में आयोजित होने वाले ब्रह्म महोत्सव में विशेष रूप से पधारने का आग्रह राजेश्री महन्त जी महाराज से किया, जिसे उन्होंने सहर्ष स्वीकार किया। उल्लेखनीय है कि स्वामी प्रपन्नाचार्य महाराज श्री दूधाधारी मठ महोत्सव एवं श्री शिवरीनारायण मठ महोत्सव में श्रोताओं को श्री रामचरितमानस एवं वाल्मीकि रामायण की कथा का रसपान करा चुके हैं जिसे लोग अभी भी बड़ी शिद्दत से याद करते हैं।






