Uttarakhand Tunnel Collapse Updates: सुरंग में फंसे मजदूरों ने मांगा खैनी, गुटखा और बीड़ी, टीम ने भेजा; एयरफोर्स के साथ नॉर्वे और थाईलैंड की टीमें भी जुटी

उत्तरकाशी. उत्तरकाशी के सिलक्यारा सुरंग में 40 श्रमिकों की जान सुरंग में कैद है। पिछले 78 घंटे से सिलक्याला सुरंग में 40 जिंदगियों की सांस अटकी हुई है। इन श्रमिकों को बाहर निकालने के लिए चल रहे खोज बचाव अभियान में कई तरह की बाधाएं उत्पन्न हो रही है। पहले कैविटी वाले क्षेत्र से लगातार गिरा और मलबे ने राह रोकी और फिर मशीन खराब हो गई।

 



दिल्ली से एयरलिफ्ट कर लाई जा रही नई मशीन के लिए सुरंग के अंदर प्लेटफार्म तैयार किया जा रहा है। गत मंगलवार को बनाए गए प्लेटफार्म और खराब हुई ऑगर ड्रिलिंग मशीन को हटाया गया है।

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मजदूरों को भेजा गया खैनी, गुटखा, बीड़ी
उत्तरकाशी। सिलक्यारा सुरंग में जो श्रमिक फंसे हैं वह शनिवार की शाम को रात्रि शिफ्ट के दौरान सुरंग में चले गए थे। रविवार की सुबह उन्हें बाहर आना था। परंतु भूस्खलन के कारण वहीं फंसे। इन श्रमिकों के लिए पानी की निकासी के पाइप के जरिये चने, चिप्स, मुरमुरे, ड्राई फ्रूट और ऑक्सीजन भेजी जा रही हैं। मंगलवार को दवा भी भेजी गई। परंतु श्रमिकों ने खैनी, गुटखा की भी मांग की। रेस्क्यू कार्य में जुटे श्रमिकों ने खैनी गुटखा, बीड़ी को भी पाइप के थ्रो भेजा।

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श्रमिकों को बाहर निकालने को बचाव कार्य तेज
देहरादून। देहरादून में सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि एयरफोर्स के तीन विशेष विमान 25 टन भारी मशीन लेकर आ रहे हैं, जो मलबे को भेद स्टील पाइप दूसरी तरफ पहुंचाने में मददगार साबित होगी। मशीन से प्रति घंटे पांच मीटर मलबा पार किया जा सकेगा। आज शाम से शुरू होगा ये कार्य। अब नार्वे व थाईलैंड की विशेष टीमों की मदद भी ली जा रही है।

दो कंपनियों ने डीपीआर पर उठाए सवाल
उत्तरकाशी। सिलक्यारा सुरंग की डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) पर सवाल खड़े किए गए हैं, जिसमें सुरंग निर्माण में क्षेत्र की चट्टानों की क्षमता को नजरअंदाज किए जाने की बात सामने आ रही है। यह सवाल परियोजना में कंसल्टेंसी का काम करने वाली दो कंपनियों ने उठाए हैं। एक कंपनी ने तो बाकायदा अपनी वेबसाइट पर डीपीआर की खामी का उल्लेख किया है।

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सुरंग में भूस्खलन की घटना के बाद पहाड़ी की कमजोर चट्टानों की पुष्टि की गई है। यह बात भी सामने आई है कि इस सुरंग में कैविटी (खोखला स्थान) टूटने से भूस्खलन का यह पहला मामला नहीं है। पहले भी सुरंग की कैविटी टूटने से मलबा गिर चुका है। वर्तमान की घटना में सुरंग में श्रमिकों के फंस जाने से यह बात खुलकर सामने आ गई है।

रेस्क्यू ऑपरेशन में ली जा रही है नार्वे व थाईलैंड की विशेष टीमों से मदद
देहरादून। उत्तरकाशी में निर्माणाधीन सुरंग में फंसे श्रमिकों को बाहर निकालने को बचाव कार्य तेज। देहरादून में सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि एयरफोर्स के तीन विशेष विमान 25 टन भारी मशीन लेकर आ रहे हैं, जो मलबे को भेद स्टील पाइप दूसरी तरफ पहुंचाने में मददगार साबित होगी। मशीन से प्रति घंटे पांच मीटर मलबा पार किया जा सकेगा। आज शाम से शुरू होगा ये कार्य। अब नार्वे व थाईलैंड की विशेष टीमों की मदद भी ली जा रही है।

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