जांजगीर-चांपा. राष्ट्र सेविका समिति की आद्य प्रमुख संचालिका लक्ष्मीबाई केलकर की जयंती ‘संकल्प दिवस’ के रूप में मनाई गई. इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में सेविकाओं ने लक्ष्मीबाई केलकर के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को स्मरण करते हुए राष्ट्र सेवा और समाज जागरण का संकल्प लिया.
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सेविका मंजूषा पाटले ने कहा कि भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपरा में महिलाओं की भूमिका सदैव महत्वपूर्ण रही है. इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए वंदनीय लक्ष्मीबाई केलकर ने वर्ष 1936 की विजयादशमी पर राष्ट्र सेविका समिति की स्थापना कर महिलाओं को संगठित करने का ऐतिहासिक कार्य किया. उन्होंने अपने जीवन से यह सिद्ध किया कि दृढ़ संकल्प और संगठन शक्ति के माध्यम से समाज और राष्ट्र को नई दिशा दी जा सकती है.






उन्होंने बताया कि 6 जुलाई 1905 को नागपुर में जन्मी लक्ष्मीबाई केलकर बचपन से ही राष्ट्रभक्ति और सामाजिक चेतना से ओतप्रोत थी. लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक के विचारों और स्वतंत्रता आंदोलन से प्रेरित होकर उन्होंने महिलाओं के संगठन की आवश्यकता को महसूस किया. बाद में, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के मार्गदर्शन में स्वतंत्र महिला संगठन के रूप में राष्ट्र सेविका समिति की स्थापना हुई। तब से यह संगठन राष्ट्र निर्माण, संस्कार निर्माण और महिला जागरण के क्षेत्र में निरंतर कार्य कर रहा है.
मंजूषा पाटले ने कहा कि मौसीजी ( लक्ष्मीबाई केलकर ) का संकल्प, त्याग और तपस्या आज भी प्रत्येक सेविका के लिए प्रेरणा का स्रोत है उनके जन्मदिवस आषाढ़ शुक्ल दशमी को समिति में ‘संकल्प दिवस’ के रूप में मनाया जाता है, जहां सेविकाएं राष्ट्र, समाज और संस्कृति के प्रति अपने दायित्वों को निभाने का संकल्प दोहराती हैं. कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सेविकाओं ने मौसीजी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी और उनके बताए मार्ग पर चलकर राष्ट्रहित में कार्य करने का संकल्प लिया.



