Judgement : जांजगीर. नाबालिग से दुष्कर्म करने वाले आरोपी को 10 वर्ष का सश्रम कारावास, अपहरण में सहयोग करने वाले आरोपी को भी सजा, फास्ट ट्रैक पॉक्सो कोर्ट के विशेष न्यायाधीश का फैसला

जांजगीर-चांपा. नाबालिग लडकी को शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने के मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट सक्ती के विशेष न्यायाधीश यशवंत कुमार सारथी ने आरोपी युवक को 10 वर्ष के कठोर कारावास और 5000 रुपए के अर्थदंड से दंडित किया है. साथ ही, नाबालिक लडकी को भगाने में आरोपी का सहयोग करने वाले उसके साथी को उसके द्वारा बिताई गई, अवधि अर्थात् 337 दिन के कठोर कारावास और 500 रूपये के अर्थदंड से दंडित किया है.

 



शासकीय विशेष लोक अभियोजक पॉक्सो राकेश महंत से प्राप्त जानकारी के अनुसार, नाबालिक के पिता ने सक्ती थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई की दिनांक 27.11.2018 को रात 9 बजे पूरा परिवार खाना खा कर सो गया था। अगले दिन दिनांक 28.11.2018 को सुबह 4 बजे देखा तो उसकी नाबालिक बेटी घर में नही थी। आस पास पता करने पर भी कुछ पता नही चला। उसे शंका है कि उसकी नाबालिग बेटी को कोई अपहरण कर ले गया है। प्रार्थी की रिपोर्ट पर सक्ती पुलिस ने धारा 363 भारतीय दंड संहिता के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया. विवेचना के दौरान आरोपी द्वारा बहला-फुसलाकर भगाए गए नाबालिग लड़की को बरामद किया गया। नाबालिग का धारा 164 दंड प्रक्रिया संहिता के तहत न्यायिक मजिस्ट्रेट के पास एवं सीडब्ल्यूसी में तथा महिला पुलिस अधिकारी के पास नाबालिग लड़की की कथन कराया गया।

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अपने बयान में नाबालिग ने बताया कि आरोपी हेमदास के द्वारा अपने साथी विजय विश्वकर्मा के साथ उसे बहला-फुसलाकर पत्नी बनाकर रखने का प्रलोभन देकर मोटर सायकल में बैठाकर भगाकर ले गया था। नाबालिग ने आरोपी द्वारा शारीरिक संबंध बनाना और उससे एक बच्चा पैदा होना बताया। नाबालिक के कथन के आधार पर प्रकरण में धारा 366(क), 376(2)(झ), 417, 506, 34 भादवि एवं 4, 6 पॉक्सो एक्ट जोड़ा गया। आरोपी के विरुद्ध अपराध सबूत पाए जाने से गिरफ्तार कर संपूर्ण विवेचना उपरांत अभियोग पत्र फास्ट ट्रैक कोर्ट सक्ती में पेश किया गया।

फास्ट ट्रैक कोर्ट के विशेष न्यायाधीश यशवंत कुमार सारथी ने उभय पक्षकारों को अपने पक्ष रखने के लिए पर्याप्त समय देने के पश्चात तथा उनके तर्क सुनने के पश्चात गवाहों और बयानों के परीक्षण के बाद अभियुक्त विजय विश्वकर्मा को भारतीय दंड संहिता की धारा 363 के अपराध के लिए उसके द्वारा न्यायिक अभिरक्षा में बिताई गई अवधि अर्थात् 337 दिन के सश्रम कारावास एवं 500 रुपए के अर्थदंड से दंडित किया है। अभियुक्त द्वारा अर्थदंड की राशि जमा नहीं करने पर एक माह पृथक सश्रम कारावास से दंडित करने का निर्णय पारित किया है।

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इसी प्रकार मुख्य अभियुक्त हेमदास को भारतीय दंड सहिता की धारा 363 के अपराध के लिए 1 वर्ष सश्रम कारावास और 500 रुपए अर्थदंड, भारतीय दंड सहित की धारा 366 के अपराध के लिए 3 वर्ष के सश्रम कारावास और 1000 रुपए अर्थदंड से दंडित किया है। घटना के समय नाबालिग 18 वर्ष से कम आयु की थी, इसलिए अभियुक्त हेमदास को भारतीय दंड सहित की धारा 376 की उपधारा-2(झ) मे दंडित न करते हुए लैंगिग अपराधों से बालको का संरक्षण अधिनियम 2012 की धारा 06 के तहत 10 वर्ष के सश्रम कारावास और 5000 रुपए के अर्थदंड से दंडित करने का निर्णय पारित किया है। अभियुक्त द्वारा अर्थदंड की राशि जमा नहीं करने पर 6 माह पृथक से सश्रम कारावास से दंडित करने का निर्णय पारित किया है।अभियुक्त हेमदास की सभी सजाएं साथ-साथ चलेगी।

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